पंचमुखी शिक्षा से समग्र ग्राम विकास की ओर बढ़ रहा एकल अभियान

शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, संस्कार, कौशल, नागरिक चेतना और आत्मनिर्भरता पर जोर; ग्रामीण समाज के समग्र विकास का लक्ष्य

Sep 20, 2026 - 19:59
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पंचमुखी शिक्षा से समग्र ग्राम विकास की ओर बढ़ रहा एकल अभियान
पंचमुखी शिक्षा से समग्र ग्राम विकास की ओर बढ़ रहा एकल अभियान
पंचमुखी शिक्षा से समग्र ग्राम विकास की ओर बढ़ रहा एकल अभियान

अतुल सिंह बघेल  / मध्यप्रदेश 

शहडोल। ग्रामीण भारत को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, संस्कार, कौशल और नागरिक चेतना से जोड़ते हुए समग्र विकास की दिशा में एकल अभियान द्वारा पंचमुखी शिक्षा की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य शिक्षा को केवल विद्यालय और पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन से जोड़ना है।

पंचमुखी शिक्षा के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य शिक्षा, ग्राम विकास शिक्षा, जागरण अथवा ग्राम स्वराज शिक्षा और संस्कार शिक्षा को प्रमुख आधार बनाया गया है। इन पांचों आयामों को एक-दूसरे से जोड़कर बच्चों, युवाओं, परिवारों और पूरे ग्रामीण समुदाय के विकास की दिशा में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

प्राथमिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों के ज्ञान और व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया जाता है। एकल विद्यालयों में बच्चों को भाषा, गणित और सामान्य ज्ञान के साथ स्वास्थ्य, योग, खेल, कहानी, गीत और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाता है। प्रार्थना एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अनुशासन और सामाजिक मूल्यों को विकसित करने का प्रयास किया जाता है। आधुनिक तकनीक के उपयोग के लिए ई-शिक्षा और डिजिटल सामग्री को भी शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

वहीं आरोग्य शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण परिवारों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। योग, औषधीय पौधों, पोषण वाटिका और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता गतिविधियों के साथ स्वास्थ्य शिविर तथा टेलीमेडिसिन जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से ग्रामीणों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एवं सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

ग्राम विकास शिक्षा के तहत गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर है। जैविक खेती, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, कौशल प्रशिक्षण, कंप्यूटर शिक्षा, युवा गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने जैसी पहल को बढ़ावा दिया जाता है। ग्रामोथान रिसोर्स सेंटर, स्किल ट्रेनिंग सेंटर और मोबाइल कंप्यूटर वैन जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और किसानों को व्यावहारिक जानकारी एवं कौशल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

पंचमुखी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पक्ष जागरण अथवा ग्राम स्वराज शिक्षा भी है। इसके माध्यम से ग्रामीणों को पंचायती राज व्यवस्था, सरकारी योजनाओं, सूचना का अधिकार, मतदाता जागरूकता और नागरिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी देने पर जोर दिया जाता है। साथ ही सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सहभागिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

संस्कार शिक्षा के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। भजन, सत्संग, योग, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा पर्व-त्योहारों के माध्यम से बच्चों और ग्रामीण समुदाय को अपनी परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और परिवार एवं समुदाय में आपसी सहयोग जैसे विषयों को भी इससे जोड़ा गया है।

एकल अभियान का मानना है कि ग्राम विकास केवल शिक्षा से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, कौशल और नागरिक सहभागिता के समन्वय से संभव है। पंचमुखी शिक्षा के इसी मॉडल के माध्यम से ऐसे ग्रामीण समाज के निर्माण की दिशा में प्रयास किया जा रहा है, जहां बच्चे शिक्षित हों, परिवार स्वस्थ हों, युवा कुशल हों, किसान सक्षम हों और ग्रामीण नागरिक अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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