बिरौड़ी में सीसी रोड निर्माण में फ्यूरी मशीन के इस्तेमाल पर सवाल,मजदूरों के हक पर ठेकेदारों का डाका
जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत बिरौड़ी में सीसी रोड निर्माण कार्य में मजदूरों की जगह मशीनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर फ्यूरी मशीन से काम कराया जा रहा है। वहीं संबंधित तकनीकी अधिकारी का कहना है कि तकनीकी स्वीकृति में मिक्सर मशीन का प्रावधान है। ऐसे में तकनीकी स्वीकृति, करार फार्म और मौके पर हो रहे कार्य की प्रक्रिया की जांच की मांग उठ रही है।
अतुल सिंह बघेल / मध्यप्रदेश
मजदूरों के हक पर मशीनों का पहरा!
शहडोल/बुढ़ार। ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों के साथ स्थानीय मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने और पलायन रोकने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर विभिन्न निर्माण कार्य कराए जाते हैं। लेकिन जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत बिरौड़ी में चल रहे सीसी रोड निर्माण कार्य को लेकर अब मजदूरों के रोजगार और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि निर्माण कार्य में मजदूरों से कराया जाने वाला काम मशीनों के माध्यम से कराया जा रहा है। मौके पर फ्यूरी मशीन से काम कराए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पंचायत के निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम हैं, तो मशीनों के इस्तेमाल से मजदूरों को मिलने वाले रोजगार का लाभ प्रभावित हो सकता है।
क्या कहता है नियम-कायदा?
ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों में लागू तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश और करार की शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं। यदि संबंधित कार्य की तकनीकी स्वीकृति और करार में मजदूरों के माध्यम से कार्य कराने तथा रोजगार उपलब्ध कराने संबंधी शर्त दर्ज है, तो मौके पर उसी के अनुरूप कार्य कराया जाना अपेक्षित है।
यही वजह है कि बिरौड़ी के सीसी रोड निर्माण में यदि तकनीकी स्वीकृति में मिक्सर मशीन का प्रावधान है, जबकि मौके पर उससे अलग फ्यूरी मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह जांच का विषय बन जाता है कि मशीन के उपयोग की अनुमति किस प्रावधान के तहत दी गई है और क्या वास्तविक कार्य स्वीकृत तकनीकी प्रावधानों के अनुरूप हो रहा है।
सरकारी योजना संबंधी जानकारी में ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरी आधारित रोजगार और मजदूरी भुगतान के प्रावधान दर्ज हैं। मध्यप्रदेश सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर ग्रामीण रोजगार संबंधी योजनाओं में ग्राम पंचायत की भूमिका और मजदूरी भुगतान की व्यवस्था भी दर्ज है।
तकनीकी अधिकारी का जवाब
मशीन के उपयोग को लेकर जब संबंधित तकनीकी अधिकारी से सवाल किया गया तो उनका कहना है कि तकनीकी स्वीकृति में मिलर मशीन का प्रावधान किया गया है।
अधिकारी के इस जवाब के बाद अब सवाल यह है कि स्वीकृति में जिस मशीन का प्रावधान है, क्या मौके पर उसी मशीन का उपयोग हो रहा है? यदि फ्यूरी मशीन का उपयोग किया जा रहा है तो उसके लिए विभागीय स्तर पर क्या अनुमति है? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—मजदूरों के हिस्से का कार्य एवं रोजगार किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है?
मजदूरों के पलायन पर भी सवाल
शहडोल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। ग्रामीण परिवारों के लिए पंचायत स्तर पर मिलने वाला रोजगार उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ही पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण मजदूरों को दूसरे प्रदेशों में पलायन करना पड़ता है।
ऐसे में यदि पंचायत के निर्माण कार्यों में मजदूरों की जगह मशीनों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो रोजगार उपलब्ध कराने और पलायन रोकने के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इन दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकता है सच
बिरौड़ी सीसी रोड निर्माण मामले में निष्पक्ष जांच के लिए तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, करार फार्म, कार्यादेश, एस्टीमेट/बीओक्यू, मस्टर रोल, माप पुस्तिका (एमबी), मजदूरी भुगतान, मशीन उपयोग संबंधी प्रावधान और संबंधित बिल-वाउचर की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यदि दस्तावेजों में मजदूरों के माध्यम से कराए जाने वाले कार्य का प्रावधान है और मौके पर उसके विपरीत कार्य कराया गया है, तो जिम्मेदारी तय करने का आधार भी इन्हीं अभिलेखों से सामने आएगा।
अब देखना यह है कि जनपद पंचायत बुढ़ार और संबंधित तकनीकी अधिकारी इस मामले में मौके की जांच कराते हैं या नहीं और यदि तकनीकी स्वीकृति एवं करार की शर्तों में अंतर मिलता है तो संबंधितों पर क्या कार्यवाही की जाती है।
जनसत्ता एक्सपोज की पड़ताल शेष अगले अंक पर
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