गौसेवा का संकल्प: शहडोल में 3 लाख हस्ताक्षरों का ज्ञापन, घायल व निराश्रित गौवंश की सेवा में जुटा अटल कामधेनु गौ संस्थान
शहडोल में गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत 3 लाख हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया। कार्यक्रम में गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने सहित कई मांगें उठीं। वहीं अटल कामधेनु गौ संस्थान द्वारा घायल, दुर्घटनाग्रस्त और फंसे गौवंश के रेस्क्यू, उपचार एवं संरक्षण के कार्यों की भी सराहना की गई।
अतुल सिंह बघेल / जनसत्ता expose
शहडोल। गौमाता की सेवा, सम्मान एवं संरक्षण के उद्देश्य से देशभर में चल रहे 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के द्वितीय चरण के अंतर्गत सोमवार को शहडोल में बड़ी संख्या में गौभक्तों ने जनभागीदारी निभाई। अभियान के तहत लगभग 3 लाख हस्ताक्षरों से युक्त समर्थन-पत्र जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया।
ज्ञापन में गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान, देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध तथा गौमाता को राष्ट्रीय आराध्या घोषित कर संवैधानिक एवं राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने से पूर्व जयस्तंभ परिसर में करीब सवा घंटे तक विजय मंत्र, संकीर्तन एवं गौरक्षा-गौसेवा के उद्घोष के साथ जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान गौभक्तों ने सनातन संस्कृति, करुणा और गौसंरक्षण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
इस अवसर पर अटल कामधेनु गौ संस्थान के कार्यों की भी लोगों ने सराहना की। संस्थान लंबे समय से जिले में घायल, दुर्घटनाग्रस्त, बीमार एवं निराश्रित गौवंश के उपचार और संरक्षण का कार्य कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल गौवंश को तत्काल रेस्क्यू कर संस्थान तक पहुंचाना, उनका चिकित्सकीय उपचार कराना, भोजन, आश्रय एवं नियमित देखभाल उपलब्ध कराना संस्थान की प्रमुख सेवाओं में शामिल है।
इसके अलावा कुओं, नालों या अन्य स्थानों पर फंसे गौवंश को सुरक्षित निकालने के लिए भी संस्थान की टीम लगातार सक्रिय रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौवंश की निस्वार्थ सेवा में संस्थान का योगदान समाज के लिए प्रेरणादायी है और ऐसे प्रयासों को व्यापक जनसहयोग मिलना चाहिए।
गौ सम्मान आह्वान अभियान के माध्यम से जहां गौसंरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण का संदेश दिया गया, वहीं अटल कामधेनु गौ संस्थान जैसे सेवा संगठनों ने यह साबित किया कि गौसेवा केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक दायित्व का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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