ई-गवर्नेंस अधिकारी शहडोल के बड़े सिंडिकेट का हुआ खुलासा,आधार सेवा संचालन में बड़ा खेल, RTI दस्तावेजों में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर शहडोल में आधार सेवा संचालन की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। दस्तावेजों में कथित विसंगतियों, आधार केंद्रों से कथित वसूली, कलेक्टर कार्यालय से संचालन और RTI आवेदक को मांगी गई सूचना के स्थान पर बड़ी संख्या में दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के आरोप सामने आए हैं। मामले में दस्तावेजों का सत्यापन कर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
अतुल सिंह बघेल / मध्यप्रदेश
शहडोल || RTI से प्राप्त दस्तावेजों में ई-गवर्नेंस अधिकारी स्वप्निल जैन के अधीन आधार संचालन से जुड़े मामले में कथित बड़े फर्जीवाड़े के संकेत सामने आए हैं। दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और वास्तविक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त अभिलेखों में सामने आ रही विसंगतियों की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय कार्यवाही किया जाना आवश्यक है साथ ही दस्तावेजों का सत्यापन कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार हैं। मामले में दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही किया जाना चाहिए।
कलेक्टर कार्यालय में बैठकर लेन देन के लग रहे है आरोप, जनसुविधा के नाम पर व्यवस्था के दुरुपयोग पर सवाल
कलेक्टर कार्यालय परिसर में ही बैठकर ई-गवर्नेंस अधिकारी स्वप्निल जैन द्वारा आधार संचालन से जुड़ी गतिविधियों और संचालन पर लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। RTI से प्राप्त दस्तावेजों में सामने आई जानकारियों ने पूरे आधार संचालन की व्यवस्था पर संदेह पैदा कर दिया है। आरोप है कि आम जनता को सुविधा देने के लिए शुरू की गई आधार सेवा व्यवस्था का कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। जब संबंधित अधिकारी कलेक्टर कार्यालय में ही बैठकर व्यवस्था का संचालन कर रहे हों, तो आम नागरिक आखिर अपनी शिकायत लेकर किसके पास जाए? दस्तावेजों में सामने आ रही विसंगतियों की उच्चस्तरीय जांच और पूरे मामले में कार्यवाही की मांग उठ रही है। सवाल यह भी है कि जनसुविधा के लिए बनाई गई व्यवस्था यदि कथित रूप से किसी निजी आर्थिक नेटवर्क या सिंडिकेट के रूप में संचालित हो रही है, तो इसकी जवाबदेही किसकी है?
कथित दलालों की सक्रियता से हर माह लाखों की वसूली?
सूत्रो से प्राप्त जानकारी के मुताबिक आधार संचालन को लेकर कथित अवैध वसूली का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि चन्द्रशेखर वर्मन, देवदास चौधरी, सूरज मिश्रा और रोहित त्रिपाठी के माध्यम से स्वप्निल जैन द्वारा प्रति आधार केंद्र प्रति माह ₹10 हजार की अवैध वसूली कर आधार संचालन कराया जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह आम जनता के लिए संचालित जनसुविधा व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। पूरे प्रकरण में संबंधित दस्तावेजों, भुगतान एवं संचालन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्यवाही किए जाने की मांग उठ रही है। सवाल यह भी है कि आधार जैसी महत्वपूर्ण जनसुविधा में कथित दलालों की भूमिका कैसे बनी और बिना विभागीय अनुमति के आर्थिक लेन-देन किस स्तर पर हो रहा था?
भ्रामक दस्तावेजों के ढेर से RTI एक्टिविस्ट को भ्रमित करने का प्रयास, मांगी गई जानकारी के विपरीत दी गई गई जानकारी
: RTI के तहत मांगी गई जानकारी करीब 10 पेज में उपलब्ध कराई जा सकती थी, लेकिन इसके स्थान पर लगभग 175 पेज के दस्तावेज भेजे जाने से सूचना देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि मांगी गई बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय बड़ी मात्रा में अनावश्यक एवं असंबंधित दस्तावेज भेज दिए गए, जिससे आवेदक को भ्रमित करने की स्थिति बनी और वास्तविक जानकारी तलाशना मुश्किल हो गया। प्राप्त दस्तावेजों में भी मांगी गई जानकारी स्पष्ट एवं पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं होने का आरोप है। यदि ऐसा जानबूझकर किया गया है तो यह RTI के उद्देश्य और पारदर्शिता की भावना का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। मामले में उपलब्ध कराए गए 175 पेज के दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मांगी गई सूचना के स्थान पर अनावश्यक सामग्री क्यों भेजी गई और वास्तविक जानकारी उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई।
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