102 पंचायतों वाले बुढ़ार में महज 30–40 पंच-उपसरपंच पहुंचे, सम्मेलन में शिकायतों की लगी झड़ी—क्या खाली कुर्सियां दे रही हैं विकास के दावों पर विरोध का संदेश?
102 पंचायतों वाले जनपद बुढ़ार में आयोजित खंड स्तरीय पंच सम्मेलन में करीब 30–40 पंच-उपसरपंचों की मौजूदगी रही। सम्मेलन में सड़क, नाली, पानी समेत कई समस्याओं को लेकर शिकायतें सामने आईं। मंच पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन पंचायतों के विकास कार्यों से जुड़े एक भी उपयंत्री की मौजूदगी नहीं रही। कम भागीदारी, खाली कुर्सियों और शिकायतों ने सम्मेलन की व्यवस्थाओं तथा जमीनी विकास को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
अतुल सिंह बघेल / मध्यप्रदेश
102 पंचायतों वाले बुढ़ार में महज 30–40 पंच-उपसरपंचों की मौजूदगी ने खड़े किए सवाल, सम्मेलन में शिकायतों की लगी झड़ी
बुढ़ार/शहडोल। जनपद पंचायत बुढ़ार में 22 अगस्त को आयोजित खंड स्तरीय पंच सम्मेलन का मंच भले ही सरकारी योजनाओं और विकास की उपलब्धियों से सजा नजर आया, लेकिन सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाकृत कम मौजूदगी और सामने आई शिकायतों ने जमीनी विकास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। जनपद पंचायत बुढ़ार के अंतर्गत कुल 102 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन कार्यक्रम में करीब 30 से 40 पंच एवं उपसरपंचों की ही मौजूदगी दिखाई दी। इतनी कम भागीदारी को लेकर अब सवाल उठ रहा है कि क्या पंचायत स्तर पर असंतोष या विरोध की कोई लहर दिखाई दे रही है?
“102 पंचायतों वाले जनपद में विकास की हकीकत बताने मंच सजा, लेकिन जिम्मेदार उपयंत्रियों की मौजूदगी तक नहीं दिखी—आखिर विकास कार्यों की जवाबदेही कौन लेगा?”
कार्यक्रम में जैतपुर विधायक जयसिंह मरावी, जिला DMF कार्यक्रम अधिकारी आशुतोष खरे, जनपद पंचायत बुढ़ार अध्यक्ष उमा धुर्वे, उपाध्यक्ष हर्ष प्रताप सिंह, मंडल उपाध्यक्ष अनुपम सिंह, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी दिवाकर सिंह, SDO बी.एस. पेद्रो, राघवेंद्र सिंह तथा A.A.O. अपर्णा मौजूद लेकिन एक भी उपयंत्री कि कार्यक्रम में मौजूदगी नहीं रही
मंच पर प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पंचायतों की समस्याएं सामने आना इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई बुनियादी जरूरतें पूरी किया जाना बाकी हैं।
102 पंचायतें, लेकिन सम्मेलन में सीमित जनप्रतिनिधि
खंड स्तरीय पंच सम्मेलन का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को योजनाओं, ग्रामीण विकास और नई व्यवस्थाओं की जानकारी देना तथा उनकी समस्याओं को सामने लाना था। लेकिन 102 पंचायतों वाले जनपद में यदि लगभग 40–50 पंच-उपसरपंच ही कार्यक्रम में पहुंचे, तो यह प्रशासन और पंचायत व्यवस्था के लिए विचारणीय विषय जरूर है। क्या जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, या फिर वे स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर निराश हैं—यह सवाल सम्मेलन के बाद चर्चा का विषय बना हुआ है।
विकास की गाथा के बीच शिकायतों की झड़ी
कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास की उपलब्धियों की चर्चा हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से समस्याओं और शिकायतों का सिलसिला भी सामने आया। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, पानी और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं ने विकास के दावों की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए।
सरकार जहां गांव-गांव तक बिजली, पेयजल और बेहतर आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में योजनाएं चला रही है, वहीं कई पंचायतों में इन सुविधाओं की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आना यह सवाल खड़ा करता है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है।
सड़कें नहीं, नालियां नहीं—बारिश में ग्रामीणों की मुश्किलें
सम्मेलन में सामने आई समस्याओं में ग्रामीण सड़कों और जल निकासी का मुद्दा प्रमुख रहा। कई ग्रामीण इलाकों में सड़कें बदहाल हैं तो कई स्थानों पर पानी की निकासी के लिए नालियों का अभाव है। बारिश के दौरान यही स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती है।
विकास कार्यों के नाम पर योजनाएं और राशि स्वीकृत होने के बावजूद यदि गांव की सड़क पर चलना मुश्किल हो और बारिश का पानी निकालने के लिए उचित नाली व्यवस्था न हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास कार्यों की प्राथमिकता और निगरानी किस स्तर पर हो रही है।
सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच कितना अंतर?
सम्मेलन में विकास और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला गया। लेकिन दूसरी ओर यदि पंचायत प्रतिनिधि सड़क, नाली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की शिकायतें लेकर सामने आ रहे हैं, तो यह समीक्षा जरूरी हो जाती है कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन किस स्तर तक पहुंचा है।
सवाल यह भी है कि क्या कागजों में दर्ज विकास और गांव की जमीन पर दिखाई देने वाला विकास एक जैसा है? यदि नहीं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
सम्मेलन ने खोली पंचायतों की जमीनी तस्वीर
खंड स्तरीय पंच सम्मेलन केवल योजनाओं की जानकारी देने वाला कार्यक्रम बनकर न रह जाए, बल्कि यहां सामने आई शिकायतों का समयबद्ध निराकरण भी हो—यही पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की अपेक्षा है। सम्मेलन में कम संख्या में प्रतिनिधियों की उपस्थिति और मौजूद प्रतिनिधियों द्वारा लगातार समस्याएं उठाए जाने को प्रशासन को गंभीरता से लेकर पंचायतवार समीक्षा करनी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सम्मेलन में उठी शिकायतें सिर्फ मंच तक सीमित रहती हैं या फिर प्रशासन इन्हें विकास की अगली कार्ययोजना में शामिल कर वास्तविक समाधान की दिशा में कदम उठाता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0