8-10 मिमी सरिये की तकनीकी स्वीकृति पर सवाल, कुडेली का टूटा स्टॉप डैम बना आईना
शहडोल जिले में स्टॉप डैम निर्माण के एस्टीमेट और तकनीकी स्वीकृति (TS) में 8 और 10 मिमी सरिये के प्रावधान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बुढ़ार जनपद की ग्राम पंचायत कुडेली में करीब 15 लाख रुपये की लागत से बना स्टॉप डैम पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त होने और बाद में नई दीवार बनाए जाने से तकनीकी डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और स्वीकृति प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
अतुल सिंह बघेल / शहडोल
जिलेभर में स्टॉप डैम के निर्माण में छोटे व्यास के सरिये के प्रावधान को लेकर उठे सवाल, करीब 15 लाख का कुडेली स्टॉप डैम पिछले वर्ष टूटा तो बनी नई दीवार
शहडोल। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंचयन और सिंचाई सुविधा के नाम पर लाखों रुपये की लागत से बनाए जा रहे स्टॉप डैम अब निर्माण की गुणवत्ता से ज्यादा उनकी तकनीकी स्वीकृति और डिजाइन को लेकर सवालों के घेरे में दिखाई दे रहे हैं। खासतौर पर कई निर्माण कार्यों के एस्टीमेट और तकनीकी स्वीकृति (TS) में 8 और 10 मिमी सरिये के प्रावधान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामला केवल ग्राम पंचायत भोगड़ा तक सीमित नहीं है। जिले में अलग-अलग स्थानों पर बन रहे स्टॉप डैम और अन्य जल संरचनाओं में 8 और 10 मिमी सरिये के प्रावधान को लेकर ग्रामीण स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। संबंधित इंजीनियरों से चर्चा करने पर कई मामलों में यही बताया जाता है कि 8 और 10 मिमी सरिया एस्टीमेट/तकनीकी स्वीकृति में ही निर्धारित है।
यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या प्रत्येक नाले, जलधारा और स्टॉप डैम की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग स्ट्रक्चरल डिजाइन और गणना की जाती है, या फिर एक जैसे प्रावधान के आधार पर तकनीकी स्वीकृतियां तैयार की जा रही हैं?
कुडेली का टूटा स्टॉप डैम बना सवालों का जीता-जागता उदाहरण
इन सवालों के बीच जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत कुडेली में करीब 15 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टॉप डैम के पिछले वर्ष टूटने का मामला सामने आता है। ग्राम सूत्रों के अनुसार बारिश और पानी के दबाव के दौरान स्टॉप डैम क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद उसी स्थान पर नई दीवार का निर्माण कराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई जल संरचना एक वर्ष भी मजबूती से नहीं टिक पाती और उसके बाद उसी स्थान पर दोबारा निर्माण करना पड़ता है, तो पूरे निर्माण की तकनीकी डिजाइन, सरिये के प्रावधान, नींव, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
यहां यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि कुडेली के स्टॉप डैम के टूटने का कारण केवल 8 या 10 मिमी सरिया था, ऐसा बिना तकनीकी जांच के नहीं कहा जा सकता। टूटने के पीछे जल प्रवाह, नींव, डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता, सामग्री, कार्यान्वयन अथवा अन्य तकनीकी कारण हो सकते हैं। इसलिए वास्तविक कारण का पता स्वतंत्र तकनीकी जांच से ही चल सकता है।
पहले उठे सवाल, फिर सामने आया टूटा निर्माण
जिले के बुढार जनपद अंतर्गत करीब 25 लाख रुपये की लागत वाले स्टॉप डैम में 8 और 10 मिमी सरिये के प्रावधान तथा करीब 10 क्विंटल सरिये की खपत को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं। उस समय भी सवाल यही था कि बड़े नाले और तेज जल प्रवाह वाले स्थानों पर संरचना के लिए सरिये का व्यास और मात्रा किस तकनीकी गणना के आधार पर निर्धारित की गई?
अब कुडेली में करीब 15 लाख रुपये की लागत वाले स्टॉप डैम के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि जिले में स्टॉप डैम औरकी तकनीकी स्वीकृति तैयार करते समय जल प्रवाह, मिट्टी की प्रकृति, नींव की स्थिति, संरचना पर पड़ने वाले दबाव और भविष्य के अधिकतम जलस्तर का वैज्ञानिक आकलन किस स्तर पर किया जा रहा है?
इंजीनियर का जवाब—“एस्टीमेट में ही 8 और 10 मिमी”
जिले के विभिन्न निर्माण कार्यों में जब 8 और 10 मिमी सरिये के उपयोग को लेकर सवाल किए जाते हैं तो संबंधित इंजीनियरों की ओर से यह तर्क सामने आता है कि सरिये का प्रावधान एस्टीमेट और तकनीकी स्वीकृति में ही किया गया है।
लेकिन यही जवाब अब एक बड़े सवाल को जन्म दे रहा है।
यदि 8 और 10 मिमी सरिया तकनीकी रूप से पर्याप्त है, तो संबंधित विभाग को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि संबंधित स्टॉप डैम के लिए किस स्ट्रक्चरल डिजाइन, किस तकनीकी गणना और किन मानकों के आधार पर यह व्यास निर्धारित किया गया।
मध्यप्रदेश शासन के उपलब्ध दिशा-निर्देशों में भी बड़े स्टॉप डैम के रूपांकन और प्राक्कलन के लिए स्थल चयन, उसकी उपयुक्तता तथा संरचना के डिजाइन में तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता बताई गई है।
सवाल सिर्फ सरिये का नहीं, पूरी संरचना का है
स्टॉप डैम की मजबूती केवल सरिये के व्यास से तय नहीं होती। इसमें नींव की गहराई, मिट्टी की प्रकृति, जल प्रवाह, कंक्रीट की गुणवत्ता, सीमेंट-रेत-गिट्टी का अनुपात, सरिये की दूरी, एंकरिंग, कवर, दीवार की मोटाई और पूरे स्ट्रक्चर का डिजाइन महत्वपूर्ण होता है।
इसलिए यदि किसी निर्माण में 8 और 10 मिमी सरिया स्वीकृत है तो केवल यह देखकर कि सरिया छोटा है, निर्माण को घटिया कहना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। लेकिन यदि उसी तरह की संरचनाएं बार-बार क्षतिग्रस्त होती हैं, तो तकनीकी स्वीकृति और वास्तविक निर्माण दोनों की जांच जरूरी हो जाती है।
क्या जिलेभर के स्टॉप डैम की हो तकनीकी जांच?
अब जरूरत केवल किसी एक पंचायत की जांच की नहीं, बल्कि जिले में हाल के वर्षों में स्वीकृत और निर्माणाधीन स्टॉप डैम की थर्ड पार्टी अथवा स्वतंत्र तकनीकी जांच की है।
जांच में यह मिलान कराया जाना चाहिए कि—
- Technical Sanction में स्वीकृत सरिये का व्यास और मात्रा क्या है?
- Structural Design किस आधार पर तैयार किया गया?
- स्थल के जल प्रवाह और मिट्टी का तकनीकी परीक्षण हुआ या नहीं?
- नींव की वास्तविक गहराई कितनी है?
- स्वीकृत डिजाइन के अनुसार सरिये की spacing और placement किया गया या नहीं?
- सीमेंट, रेत और गिट्टी की गुणवत्ता तथा मिश्रण निर्धारित मानक के अनुरूप है या नहीं?
- Measurement Book में दर्ज कार्य और मौके की वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है?
- भुगतान किस मात्रा और किस माप के आधार पर किया गया?
- पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हुए स्टॉप डैम की तकनीकी जांच में क्या कारण सामने आया था?
टूटने के बाद नई दीवार, लेकिन पुरानी गलती का क्या?
कुडेली का मामला सबसे महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि ग्रामीण सूत्रों के अनुसार स्टॉप डैम क्षतिग्रस्त होने के बाद उसी स्थान पर नई दीवार बनाई गई।
सरकारी धन के साथ ग्रामीणों की उम्मीद भी जुड़ी
स्टॉप डैम केवल सरकारी बजट से बनने वाली एक सीमेंट-कंक्रीट की दीवार नहीं है। इसके पीछे किसानों की सिंचाई, जलसंचयन, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उम्मीद जुड़ी होती है।
यदि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई संरचना कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त हो जाती है और फिर उसी स्थान पर दोबारा सरकारी धन खर्च करना पड़ता है, तो यह केवल निर्माण की गुणवत्ता का सवाल नहीं रहता, बल्कि तकनीकी स्वीकृति से लेकर निरीक्षण और भुगतान तक पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़ा करता है।
अब जवाब चाहिए—8 और 10 मिमी का आधार क्या?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिले में जहां भी स्टॉप डैम के एस्टीमेट और TS में 8 तथा 10 मिमी सरिये का प्रावधान किया गया है, वहां इसकी तकनीकी आवश्यकता किस गणना से तय हुई?
क्या सभी स्थानों की परिस्थितियां समान हैं?
क्या प्रत्येक स्थल का स्वतंत्र स्ट्रक्चरल डिजाइन तैयार किया गया?
और यदि किसी स्टॉप डैम के क्षतिग्रस्त होने के बाद नई दीवार बनाई गई है, तो क्या उसकी डिजाइन और तकनीकी स्वीकृति को पुराने निर्माण की विफलता के आधार पर पुनः परीक्षण किया गया?
इन सवालों का जवाब कागजी दावों से नहीं, बल्कि Technical Sanction, Structural Design, MB और स्वतंत्र तकनीकी जांच से सामने आना चाहिए।
कुडेली का टूटा स्टॉप डैम और जिले में 8-10 मिमी सरिये के प्रावधान को लेकर उठ रहे सवाल अब एक व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं—ताकि बारिश के बाद संरचना टूटने का इंतजार करने के बजाय निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती की सच्चाई सामने आ सके।
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