सावन की फुहारों से सड़क बनी दलदल, स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर एम्बुलेंस तक बेहाल
खरला ग्राम पंचायत, मुर्धवा टोला, मुर्धवा टोला पहुंच मार्ग, सड़क की बदहाली, सड़क में गड्ढे, जलभराव, कीचड़, दलदल, स्कूल जाने वाले बच्चे, एम्बुलेंस की परेशानी, ग्रामीण सड़क, सड़क निर्माण, तकनीकी निरीक्षण, संबंधित अधिकारी, ग्रामीण विकास, सड़क गुणवत्ता
अतुल सिंह बघेल / मध्यप्रदेश
खरला पंचायत के मुर्धवा टोला पहुंच मार्ग की बदहाली पर उठे गंभीर सवाल — बड़े-बड़े गड्ढों में भरा पानी, पूरे मार्ग पर कीचड़; ग्रामीणों का आरोप-तकनीकी निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित
खरला। ग्राम पंचायत खरला के मुर्धवा टोला पहुंच मार्ग की तस्वीरें ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और सड़क निर्माण की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। सावन की बारिश के बाद सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है और पूरा मार्ग कीचड़ व दलदल में तब्दील हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को पैदल चलने में भी भारी परेशानी हो रही है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है। कीचड़ और पानी से भरे गड्ढों के बीच बच्चों का स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए और आपात स्थिति में एम्बुलेंस बुलानी पड़े तो इस मार्ग से अस्पताल तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।
क्या यह है स्वच्छ भारत और ग्रामीण विकास की जमीनी तस्वीर?
एक ओर गांवों में विकास और स्वच्छता के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश आते ही पहुंच मार्ग दुरुस्त होने के बजाय दर्दनाक दलदल में बदल गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि सड़क निर्माण अथवा मरम्मत के दौरान क्या जल निकासी और बारिश के मौसम को ध्यान में रखा गया था?
तकनीकी निरीक्षण पर भी सवाल
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित तकनीकी निरीक्षक, उपयंत्री अथवा जिम्मेदार अधिकारी इस मार्ग का नियमित निरीक्षण करते हैं या नहीं? यदि अधिकारी मौके का निरीक्षण करते हैं तो उन्हें सड़क की यह स्थिति दिखाई क्यों नहीं देती?
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की समस्या को लेकर तकनीकी निरीक्षक को फोन करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार फोन रिसीव नहीं किया जाता। ऐसे में ग्रामीण अपनी समस्या किस जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंचाएं, यह भी बड़ा सवाल बन गया है।
क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी निर्माण कार्य के बाद उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और मौके की वास्तविक स्थिति की निगरानी संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। यदि सड़क बारिश में चलने लायक नहीं रहती और बच्चों, ग्रामीणों तथा आपातकालीन सेवाओं को परेशानी होती है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या विकास कार्य केवल ठेकेदार अथवा संबंधित निर्माण एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए दिए जाते हैं, या फिर उनका वास्तविक उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना भी है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर मुर्धवा टोला पहुंच मार्ग की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करते हैं या फिर यह सड़क और इसके गड्ढे अगली बारिश तक ग्रामीणों की परेशानी बने रहते हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, सड़क की गुणवत्ता एवं निर्माण में उपयोग सामग्री की जांच करें तथा जलभराव और कीचड़ की समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
1
Angry
0
Sad
0
Wow
0