अधूरी मेढ़ के बीच घाट निर्माण की तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियरिंग पर उठे सवाल
ग्राम पंचायत नगपुरा के डोंगरीटोला में तालाब जीर्णोद्धार का मिट्टी भराई कार्य अधूरा होने के बावजूद घाट निर्माण की तकनीकी स्वीकृति जारी होने से तकनीकी प्रक्रिया और निरीक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। DPR, तकनीकी स्वीकृति, MB और भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग उठ रही है।
अतुल सिंह बघेल / मध्यप्रदेश
अधूरे तालाब जीर्णोद्धार कार्य के बीच ही, जारी कर दी गई नवीन घाट निर्माण की स्वीकृति
शहडोल || ग्राम पंचायत नगपुरा के डोंगरीटोला में तालाब जीर्णोद्धार का कार्य इन दिनों सवालों के घेरे में है। मौके की तस्वीरें और स्थानीय स्तर से मिल रही जानकारी के अनुसार तालाब में मिट्टी भराई का कार्य अभी पूरी तरह पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन घाट निर्माण की तकनीकी स्वीकृति जारी कर दिया गया है। ऐसे में तकनीकी स्वीकृति और तकनीकी निरीक्षण अधिकारी पर सवाल उठ रहा है ।
सवाल यह उठता है कि जब मौके पर तालाब का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है तो घाट निर्माण की स्वीकृति कैसे हो गई दूसरा सवाल यह भी उठता है कि क्या तकनीकी निरीक्षण अधिकारी के द्वारा मौके का निरीक्षण नहीं किया गया था या फिर पोर्टल पर आधी अधूरी तालाब को पूर्ण दिखाया गया है ऐसे कई सवाल है जो नागपुरा में बना रहे तालाब एवं घाट निर्माण पर उठ रहे हैं।
अधूरी मेढ़ फिर भी घाट पूरा करने की जल्दबाजी
घाट निर्माण कार्य में सामान्य तकनीकी दृष्टि से आधार और भराव को पर्याप्त रूप से तैयार किए बिना उसके ऊपर संरचना खड़ी करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। डोंगरीटोला के तालाब के मेढ़ में यदि मिट्टी भराई अभी अधूरी है और उसी क्षेत्र में घाट निर्माण आगे बढ़ाया जा रहा है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि काम की प्राथमिकता और तकनीकी निगरानी आखिर किस आधार पर तय की जा रही है?
सेक्टर में गूंजता सवाल—इंजीनियर या इंजीनियर की ठेकेदारी?
इस पूरे मामले ने एक और बड़ा चर्चा का विषय है —क्या निर्माण कार्य सिर्फ कागजों में तकनीकी निगरानी के भरोसे चल रहा है, या मौके पर भी इंजीनियरिंग मानकों की उतनी ही गंभीरता से निगरानी हो रही है?
यदि किसी निर्माण कार्य में तकनीकी अधिकारी की भूमिका गुणवत्ता सुनिश्चित करने की है, तो सवाल यह है कि अधूरी मिट्टी भराई के बीच घाट निर्माण की अनुमति और निगरानी किस आधार पर हो रही हैं
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अन्य निर्माण कार्य जैसे स्टॉप डैम, पुलिया, लघु तालाब में इंजीनियर साहब के ठेकेदारी की भूमिका रहती है काली मिट्टी व सामग्री पेमेंट में भी साहब बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं
घाट की मजबूती से पहले जांच जरूरी
घाट निर्माण शुरू हो चुका है तो उसकी नींव, बेस, निर्माण सामग्री, सरिया, सीमेंट-कंक्रीट की गुणवत्ता तथा स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन के अनुरूप निर्माण की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि नीचे की मिट्टी और भराव पूरी तरह तैयार नहीं है, तो भविष्य में संरचना के बैठने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका को तकनीकी विशेषज्ञों से जांचना जरूरी है।
DPR और MB बताएंगे असली तस्वीर
मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए तालाब जीर्णोद्धार की DPR, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (MB), कार्यादेश, सामग्री की मात्रा और अब तक किए गए भुगतान की जांच जरूरी है। इन दस्तावेजों को मौके के वास्तविक कार्य से मिलाया जाए तो स्पष्ट हो सकता है कि कागज पर कितना काम दर्ज है और जमीन पर कितना काम हुआ है।
अब जिम्मेदारों से जवाब की दरकार
डोंगरीटोला के ग्रामीणों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब संबंधित पंचायत और तकनीकी अमले को देना चाहिए। क्या मिट्टी भराई पूरी होने से पहले घाट निर्माण तकनीकी रूप से उचित है? क्या मौके पर नियमित तकनीकी निरीक्षण हो रहा है? और यदि निर्माण में कोई कमी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
तालाब का जीर्णोद्धार जनता के पैसे से हो रहा है—ऐसे में सवाल सिर्फ घाट बनने का नहीं, बल्कि घाट कितने मजबूत और मानकों के अनुरूप बन रहा है, इसका है।
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