सड़क पर तड़पता गोवंश, खामोश सिस्टम! 9 साल से गुहार लगा रहे गौसेवक
शहडोल में बढ़ती गोवंश सड़क दुर्घटनाओं, घायल पशुओं के समय पर उपचार की कमी और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान ने एडीएम को ज्ञापन सौंपा। संस्थान ने 24×7 पशु चिकित्सक, रेस्क्यू एम्बुलेंस, आर्थिक सहयोग और बेसहारा गोवंश छोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
अतुल सिंह बघेल/ शहडोल
शहडोल। एक ओर सरकारें गौ संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने और विभिन्न योजनाओं के संचालन का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले की सड़कों पर घायल और दम तोड़ते गोवंश इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
घायल गोवंशों के लिए 24×7 समर्पित पशु चिकित्सक की तैनाती की मांग
अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान ने ज्ञापन में मांग की है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल गोवंशों के त्वरित उपचार के लिए जिले में 24×7 एक समर्पित पशु चिकित्सक की ड्यूटी निर्धारित की जाए। साथ ही आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयां, प्राथमिक उपचार किट और रेस्क्यू टीम उपलब्ध कराई जाए, ताकि दुर्घटना के बाद "गोल्डन ऑवर" में इलाज शुरू हो सके और अधिक से अधिक गोवंशों के प्राण बचाए जा सकें। संस्थान का कहना है कि वर्तमान में समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने के कारण कई घायल गोवंश असमय दम तोड़ देते हैं।
हालातगंभीर समस्या को लेकर अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान के गौसेवक गौरव राल्ही मिश्रा, राम दुबे एवं प्रियांक मिश्रा ने अपर कलेक्टर सर्वर्धन सिंह को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि जिले में प्रतिदिन 8 से 9 गोवंश सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। कई बार घायल गोवंश घंटों तक सड़क किनारे तड़पते रहते हैं, लेकिन समय पर पशु चिकित्सक और आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी मौत हो जाती है। गौसेवकों का कहना है कि यदि 24 घंटे समर्पित पशु चिकित्सक, जीवनरक्षक दवाइयां और रेस्क्यू व्यवस्था उपलब्ध हो जाए तो बड़ी संख्या में गोवंशों की जान बचाई जा सकती है।
संस्थान ने बताया कि 29-30 जुलाई की दरमियानी रात होटल कुंदन पैलेस से बुढ़ार पंचवटी मार्ग तक 12 गोवंश सड़क दुर्घटना का शिकार हुए, जिनमें 9 की मौत हो गई, जबकि 3 घायल गोवंशों का संस्थान द्वारा रेस्क्यू कर उपचार किया जा रहा है। यह घटना जिले में निराश्रित गोवंशों की समस्या और प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता को उजागर करती है।
गौसेवकों ने कहा कि जिले में कई गौशालाएं संचालित होने के बावजूद नगर पालिका क्षेत्र की सड़कों पर बड़ी संख्या में गोवंश खुलेआम बैठे रहते हैं। आरोप है कि उन्हें सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलाया जाता। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि दूध देना बंद होने पर गोवंश को सड़कों पर छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और आर्थिक जुर्माना लगाया जाए, ताकि यह प्रवृत्ति रोकी जा सके।
संस्थान का कहना है कि वह पिछले 9 वर्षों से लगातार जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता, दवाइयां, सेवादार, हाइड्रोलिक रेस्क्यू एम्बुलेंस और 24×7 पशु चिकित्सक की मांग करता आ रहा है, लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बन सकी। वर्तमान में संस्थान 250 से अधिक घायल गोवंश एवं अन्य मूक जीवों का उपचार और पालन-पोषण केवल जनसहयोग के माध्यम से कर रहा है। अब तक 25 हजार से अधिक गोवंश एवं अन्य मूक जीवों का रेस्क्यू कर उन्हें नया जीवन दिया जा चुका है।
गौसेवकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार नगरपालिका से सहयोग मांगे जाने के बावजूद अपेक्षित सहायता नहीं मिलती, जबकि सड़क पर घायल गोवंशों को उठाने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की भी है। उनका कहना है कि यदि सभी विभाग समन्वय से कार्य करें तो दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि जिले में घायल गोवंशों के लिए 24 घंटे समर्पित पशु चिकित्सक की ड्यूटी, हाइड्रोलिक रेस्क्यू एम्बुलेंस, पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता, गौशालाओं का प्रभावी संचालन तथा निराश्रित गोवंश छोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाज के नाम अपील
अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान ने जिले के समाजसेवियों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी आगे आने की अपील की है। संस्थान का कहना है कि जब तक सरकारी स्तर पर स्थायी व्यवस्था नहीं बनती, तब तक घायल और बेसहारा गोवंशों की सेवा के लिए समाज के सहयोग की आवश्यकता है। आर्थिक सहायता, चारा, दवाइयां, वाहन, श्रमदान या स्वयंसेवा—जिससे जो संभव हो, वह आगे बढ़कर मूक जीवों के जीवन बचाने में योगदान दे।
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