सीधी थाना की कार्यप्रणाली पर सवाल, क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार?
सीधी थाना क्षेत्र के ग्राम छत्ता में महिला से कथित छेड़छाड़, धमकी और सोशल मीडिया पर फोटो-रील लगाने के मामले में शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्यवाही नहीं होने के आरोप लगे हैं। पीड़िता ने 24 जुलाई को थाना, 1 अगस्त को 181 हेल्पलाइन और 11 अगस्त को SP व ADGP कार्यालय में शिकायत की। थाना पुलिस की कथित कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पीड़िता ने निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है।
अतुल सिंह बघेल / शहडोल
छेड़छाड़, धमकी और सोशल मीडिया पर फोटो लगाने की शिकायत के बाद भी कथित निष्क्रियता का आरोप, पीड़िता ने SP-ADGP से लगाई गुहार
शहडोल। सीधी थाना क्षेत्र के ग्राम छत्ता में महिला से कथित छेड़छाड़, उसके पति को जान से मारने की धमकी और सोशल मीडिया पर महिला की तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने का मामला अब थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़िता का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई, बल्कि 181 हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद पुलिस उसके घर पहुंची और कथित रूप से शिकायत बंद कराने का दबाव बनाया।
ग्राम छत्ता निवासी संतोष सिंह की पत्नी चंद्रकली सिंह ने गांव के ही निवासी कमलेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक आरोपी महिला को घर में अकेला पाकर कथित रूप से छेड़छाड़ करता है तथा उसके पति संतोष सिंह को जान से मारने की धमकी देता है। पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसकी तस्वीरों को आरोपी ने अपने WhatsApp Status और सोशल मीडिया अकाउंट पर इस्तेमाल किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी के Facebook अकाउंट पर भी उसकी फोटो एवं Reels मौजूद हैं।
24 जुलाई की शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत
पीड़िता के अनुसार उसने मामले की शिकायत 24 जुलाई 2026 को थाना सीधी में की थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस द्वारा अपेक्षित कार्यवाही नहीं की गई। इसके बाद पीड़िता ने 1 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई।
हेल्पलाइन शिकायत के बाद 2 अगस्त 2026 को थाना सीधी की पुलिस टीम संतोष सिंह के घर पहुंची। पीड़िता और उसके पति का आरोप है कि पुलिस ने उनसे शिकायत बंद कराने को कहा और कथित रूप से धमकी दी कि शिकायत बंद नहीं की गई तो कार्यवाही नहीं होगी। आरोप है कि पुलिस ने संतोष सिंह का मोबाइल फोन लेकर आरोपी के Facebook/WhatsApp पर मौजूद कथित फोटो एवं Reels देखने की बात कही और इसके बाद शिकायत बंद करा दी।
शिकायत बंद हुई, लेकिन डर और कथित धमकियां नहीं
पीड़िता का आरोप है कि पुलिस से अपेक्षित कार्यवाही नहीं होने के बाद आरोपी का कथित हौसला और बढ़ गया तथा डराने-धमकाने का सिलसिला जारी रहा। लगातार भय और मानसिक दबाव के चलते पीड़िता ने 11 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कार्यालय पहुंचकर शिकायत प्रस्तुत की और निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्यवाही की मांग की।
पुलिस की निष्क्रियता कहीं किसी बड़ी घटना को न्योता तो नहीं?
यह पूरा मामला अब सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि थाना सीधी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो 24 जुलाई की शिकायत के बाद समय रहते प्रभावी कार्यवाही क्यों नहीं हुई? कथित सोशल मीडिया पोस्ट और Reels की जांच क्यों नहीं की गई? पीड़िता और उसके पति को सुरक्षा का भरोसा क्यों नहीं दिया गया? और 181 की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो शिकायत बंद कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब शिकायतकर्ता पहले से डराने-धमकाने की बात कह रही हो, तब पुलिस की कथित निष्क्रियता से स्थिति और गंभीर होने की आशंका से इनकार कैसे किया जा सकता है? क्या पुलिस किसी बड़ी अप्रिय घटना का इंतजार कर रही है?
ऐसे मामलों में समय पर शिकायत की जांच और आवश्यक वैधानिक कार्यवाही न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है, बल्कि किसी संभावित गंभीर घटना को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
SP-ADGP के संज्ञान का इंतजार
पीड़िता द्वारा 11 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई शिकायत के बाद अब निगाहें पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्तर पर होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं। पीड़िता की मांग है कि पूरे मामले की थाना सीधी से अलग और निष्पक्ष स्तर पर जांच कराई जाए तथा उसे और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आरोपी कमलेश सिंह और थाना सीधी पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा।
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