“हर्री में विकास के नाम पर विनाश का अनोखा संगम, 25 लाख की सड़क बनी दलदल की पहचान!”

जनपद पंचायत बुढ़ार की ग्राम पंचायत हर्री में करीब 25 लाख रुपये की लागत से बनी बताई जा रही ग्रेवल रोड की बदहाल स्थिति ने निर्माण गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों ने क्रेशर मटेरियल की जगह मिट्टी-मुरम के उपयोग का आरोप लगाया है। अधूरे कार्य के बावजूद पूर्ण भुगतान हुआ या नहीं, इसकी तकनीकी जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की मांग उठ रही है।

Aug 17, 2026 - 22:40
Aug 17, 2026 - 22:41
 0  25

अतुल सिंह बघेल  / मध्यप्रदेश 

हर्री में करीब 25 लाख की ग्रेवल रोड पर बड़ा सवाल—सड़क अधूरी, भुगतान पूरा कैसे?

शहडोल/बुढ़ार। जनपद पंचायत बुढ़ार की ग्राम पंचायत हर्री में करीब 25 लाख रुपये की लागत से कराई गई बताई जा रही ग्रेवल रोड की जमीनी स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के दौरान सड़क पर पानी, कीचड़ और दलदल की स्थिति दिखाई दे रही है, जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का आवागमन मुश्किल हो गया है।

स्कूल पहुंच मार्ग बना मुसीबत

जिस रास्ते को स्कूल पहुंच मार्ग के रूप में विकसित किया जाना बताया जा रहा है, वही बारिश में बदहाल नजर आ रहा है। सड़क पर जगह-जगह पानी जमा है और वाहनों के पहियों से बने गहरे निशान इसकी स्थिति बयां कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण से पहले भी इस रास्ते से आवागमन होता था, लेकिन निर्माण के बाद स्थिति बेहतर होने के बजाय और खराब दिखाई दे रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर लाखों रुपये खर्च होने के बाद सड़क का यह हाल क्यों है?

क्रेशर मटेरियल की जगह मिट्टी-मुरम का आरोप

निर्माण सामग्री को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क में स्वीकृत मानक के अनुसार क्रेशर मटेरियल/सीआरएम का उपयोग नहीं किया गया और मौके पर मिट्टी-मुरम अधिक दिखाई दे रही है।

इन आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए स्वीकृत प्राक्कलन, माप पुस्तिका (MB), सामग्री की मात्रा, बिल-वाउचर और मौके पर मौजूद सामग्री का तकनीकी मिलान जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल—अधूरा काम तो पूरा भुगतान कैसे?

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल भुगतान को लेकर है। यदि कार्य वास्तव में अधूरा है और इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसे पूर्ण दर्शाकर भुगतान किया गया है, तो यह जांच का विषय है।

सवाल है—

- अधूरे कार्य को पूर्ण किसने प्रमाणित किया?

- माप किस अधिकारी ने लिया?

- MB में कितना कार्य दर्ज किया गया?

- मूल्यांकन किस आधार पर हुआ?

- भुगतान की स्वीकृति किसने दी?

“पैसा लैप्स हो जाता”—इंजीनियर की सफाई से बढ़े सवाल

संबंधित इंजीनियर से बातचीत के दौरान ठेकेदार को लाभ दिलाने के लिए कथित रूप से यह बात सामने आई कि समय पर राशि का उपयोग नहीं होने पर “पैसा लैप्स हो जाता” और योजना को VB-G-RAM-G में परिवर्तित किया जाना था।

यदि ऐसा कोई आधिकारिक प्रावधान या आदेश था, तो उसकी प्रति भी सामने आनी चाहिए। साथ ही यह स्पष्ट होना चाहिए कि योजना परिवर्तन की प्रक्रिया में कार्य की वास्तविक प्रगति क्या थी और भुगतान किस आधार पर किया गया।

कागज और जमीन का मिलान जरूरी

इस मामले में निष्पक्ष तकनीकी जांच से कई सवालों का जवाब मिल सकता है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, मोटाई, उपयोग की गई सामग्री और MB में दर्ज मात्रा का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

साथ ही कार्य की स्वीकृति, प्राक्कलन, पूर्णता प्रमाण-पत्र, भुगतान अभिलेख, सामग्री के बिल-वाउचर, जियो-टैग फोटो और पोर्टल पर दर्ज विवरण का भी मिलान जरूरी है।

जांच में इन बिंदुओं का हो सत्यापन

1. सड़क की स्वीकृत लागत और प्राक्कलन।

2. स्वीकृत लंबाई, चौड़ाई, मोटाई और निर्माण सामग्री।

3. MB में दर्ज कार्य और मौके पर वास्तविक कार्य।

4. क्रेशर मटेरियल/सीआरएम की स्वीकृत एवं वास्तविक मात्रा।

5. सामग्री के बिल, वाउचर और भुगतान अभिलेख।

6. कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और उसे जारी करने वाले अधिकारी।

7. माप एवं मूल्यांकन करने वाले तकनीकी अधिकारी की भूमिका।

8. अधूरे कार्य की स्थिति में किए गए भुगतान का आधार।

9. भुगतान से पहले किए गए स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट।

10. जियो-टैग फोटो एवं पोर्टल पर दर्ज विवरण का मौके से मिलान।

11. राशि लैप्स होने अथवा योजना परिवर्तन संबंधी आधिकारिक आदेश।

12. संबंधित पंचायत और तकनीकी अमले की भूमिका।

जांच में गड़बड़ी मिली तो तय हो जिम्मेदारी

यदि जांच में निर्धारित सामग्री से कम सामग्री का उपयोग, गलत माप, अधूरे कार्य को पूर्ण दर्शाने या वास्तविक कार्य से अधिक भुगतान की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तय की जानी चाहिए। नियमानुसार शासकीय राशि की वसूली, विभागीय कार्यवाही और अन्य वैधानिक कार्यवाही पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

अब सवाल सड़क से ज्यादा जवाबदेही का

हर्री की यह सड़क बारिश में कीचड़ और पानी से घिरी है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल सरकारी रिकॉर्ड और धरातल के बीच संभावित अंतर का है।

करीब 25 लाख रुपये की लागत, बदहाल सड़क, निर्माण सामग्री को लेकर आरोप और पूर्ण भुगतान की चर्चा—इन सभी सवालों का जवाब कागज और जमीन के संयुक्त सत्यापन से ही मिल सकता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 1
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0