विकास के नाम पर विनाश का मंजर, मॉडल सड़क बनी रहवासियों के लिए मुसीबत

शहडोल में इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड तक बन रही मॉडल सड़क का निर्माण बारिश के बीच शुरू होने से रहवासी और व्यापारी परेशान हैं। सड़क किनारे गहरे गड्ढों, जलभराव, नाली और बिजली के खंभों की व्यवस्था नहीं होने से आवागमन प्रभावित है। स्थानीय लोगों ने वैकल्पिक मार्ग, जल निकासी और निर्माण कार्य में तेजी की मांग की है।

Aug 12, 2026 - 20:57
Aug 12, 2026 - 20:57
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विकास के नाम पर विनाश का मंजर, मॉडल सड़क बनी रहवासियों के लिए मुसीबत
विकास की यात्रा

अतुल सिंह बघेल / शहडोल 

शहडोल। विकास की आड़ में जब बिना सोच-समझे और बिना कार्ययोजना के काम शुरू किया जाता है, तो वह जनता के लिए सुविधा नहीं बल्कि मुसीबत बन जाता है। कुछ ऐसा ही मंजर इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड जाने वाले मॉडल रोड पर देखने को मिल रहा है। नगर पालिका प्रशासन और ठेकेदार की घोर लापरवाही के कारण यह महत्वाकांक्षी रोड निर्माण परियोजना स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों के लिए ‘विकास’ नहीं, बल्कि ‘विनाश’ की कहानी लिख रही है।

मौसम की परवाह किए बिना पहले तो अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गयी और फिर भरी बारिश में शुरू किया गया यह निर्माण काम अब क्षेत्रवासियों के जी का जंजाल बन चुका है।

नाली, न बिजली के खंभे; बस खोदे गए 2 फीट के गड्ढे

रोड निर्माण का ठेका देकर जिम्मेदारों ने अपनी औपचारिकता तो पूरी कर ली, लेकिन जमीनी हकीकत डरावनी है। सड़क के दोनों ओर न तो अब तक बिजली के खंभे शिफ्ट किए गए और न ही जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण शुरू हुआ। इसके उलट, सड़क के दोनों साइड पर 2-2 फीट गहरे गड्ढे खोदे जा रहे है। लगातार हो रही बारिश से ये गड्ढे अब जानलेवा जलभराव में तब्दील हो चुके हैं।

आपातकालीन सेवाएं ठप, घरों में कैद हुए लोग

सड़क के दोनों अंतिम छोरों पर मिट्टी का ढेर लगाकर “मार्ग परिवर्तित” का बोर्ड तो टांग दिया गया है, लेकिन वैकल्पिक रास्ता किधर है? यह शायद सिर्फ नगर पालिका के अधिकारियों को ही पता है। हालत यह है कि रहवासियों का अपने ही घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है।

यदि किसी घर में कोई बीमार पड़ जाए या आपातकालीन स्थिति बन जाए, तो न तो लोग अपने निजी वाहन निकाल सकते हैं और न ही एम्बुलेंस के अंदर आने का कोई रास्ता बचा है। क्षेत्रवासी अपने ही घर में एक तरह से बंधक बनकर रह गए हैं।

अतिक्रमण के घाव अभी भरे नहीं थे कि रोजी-रोटी पर लग गया ताला

व्यापारियों का दर्द दोहरा है। हाल ही में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के नाम पर लोगों की दुकानों और मकानों के हिस्सों को उजाड़ दिया था। व्यापारी जैसे-तैसे अपना कारोबार दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे थे कि अब इस आधी-अधूरी रोड खुदाई ने उनके व्यापार पर पूरी तरह ताला लटका दिया है।

सड़क पूरी तरह ध्वस्त होने और रास्ते बंद हो जाने से ग्राहकों की आवाजाही शून्य हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि "भरी बारिश में शुरू हुआ यह काम कम से कम 4 महीने तक खिंचेगा। इतने लंबे समय तक धंधा ठप रहने से हमारे सामने रोजी-रोटी और परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।"

ठंडे बस्ते में जनप्रतिनिधि और अधिकारी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका के आला अधिकारी और जिम्मेदार ठेकेदार अपने वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं। न तो निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही जनता की बुनियादी तकलीफों की परवाह है। भरे मानसून में बिना किसी ड्रेनेज प्लान के सड़क खोद देना यह साबित करता है कि योजना केवल कागजों में बनाई गई थी।

क्षेत्रीय रहवासियों और व्यापारियों की मांग है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, तत्काल सुगम वैकल्पिक मार्ग व जल निकासी की व्यवस्था की जाए। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो आक्रोशित जनता और व्यापारी वर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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