जनपद बुढ़ार में स्थानांतरण का नया मोड़: आखिर जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति को कौन कर रहा गुमराह? कौन है जिले का मास्टर माइंड?

सख्त कार्यशैली से बढ़ी हलचल में राजनीतिक दबाव की कोशिश? जिला पंचायत सीईओ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म

Jul 18, 2026 - 22:50
Jul 18, 2026 - 23:28
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जनपद बुढ़ार में स्थानांतरण का नया मोड़: आखिर जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति को कौन कर रहा गुमराह? कौन है जिले का मास्टर माइंड?
जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति
जनपद बुढ़ार में स्थानांतरण का नया मोड़: आखिर जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति को कौन कर रहा गुमराह? कौन है जिले का मास्टर माइंड?
जनपद बुढ़ार में स्थानांतरण का नया मोड़: आखिर जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति को कौन कर रहा गुमराह? कौन है जिले का मास्टर माइंड?
जनपद बुढ़ार में स्थानांतरण का नया मोड़: आखिर जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति को कौन कर रहा गुमराह? कौन है जिले का मास्टर माइंड?
जनपद बुढ़ार में स्थानांतरण का नया मोड़: आखिर जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति को कौन कर रहा गुमराह? कौन है जिले का मास्टर माइंड?

""शहडोल -अतुल सिंह बघेल ,,

जनसत्ता Expose 

बुढ़ार- जनपद-सचिव-स्थानांतरण-प्रकरण-नया- मोड़ 

शहडोल। जनपद पंचायत बुढ़ार में पंचायत सचिवों के स्थानांतरण का मामला अब और अधिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। 16 जून 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश, उसके बाद 25 जून को जारी कारण बताओ नोटिस और फिर 15 जुलाई को उन्हीं सचिवों को पुरानी पंचायत के साथ नई पंचायत का भी अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से कई प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं।

पहले रहस्यमय स्थानांतरण, फिर एक ही दिन में दो आदेश! आखिर 15 जुलाई को ऐसा क्या हुआ कि पहले आदेश में तत्काल संशोधन कर दूसरा  आदेश जारी करना पड़ा l

 जनपद पंचायत बुढ़ार में पंचायत सचिवों के स्थानांतरण का मामला पहले से ही रहस्यमय बना हुआ था। 16 जून को स्थानांतरण आदेश जारी हुआ, आदेश का पालन नहीं होने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन कार्रवाई के बजाय पूरा घटनाक्रम नया मोड़ लेता नजर आया। अब 15 जुलाई को एक ही दिन में दो आदेश जारी होने से मामला और भी संदेह के घेरे में आ गया है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन-सी असाधारण परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि पहले जारी आदेश में उसी दिन संशोधन कर दूसरा आदेश निकालना पड़ा?

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किया गया था, तो संबंधित सचिवों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई अपेक्षित नहीं थी, तो कारण बताओ नोटिस जारी करने की आवश्यकता क्या थी?

प्रकरण में नया सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति तक सही तथ्य पहुंचाए गए थे, या उन्हें अधूरी अथवा भ्रामक जानकारी के आधार पर निर्णय लेने के लिए विवश किया गया? यदि ऐसा है, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि शासन की स्थानांतरण व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न है।

चर्चा इस बात की भी है कि जिन सचिवों को नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना था, उन्हें बाद में पुरानी पंचायतों का भी प्रभार सौंप दिया गया। यदि दोनों पंचायतों का ही प्रभार देना था, तो स्थानांतरण आदेश जारी करने का उद्देश्य क्या था? यह प्रश्न अब जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब कई सवाल प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय हैं—

क्या 15 जुलाई का पहला आदेश त्रुटिपूर्ण था?यदि हां, तो त्रुटि किस स्तर पर हुई?

संशोधित आदेश जारी करने की तत्काल आवश्यकता क्यों पड़ी?

क्या संशोधन किसी प्रशासनिक विवशता में हुआ या किसी अन्य कारण से?

क्या इस संशोधन के पीछे किसी अधिकारी द्वारा गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए?

आखिर कौन है जो पूरे स्थानांतरण प्रकरण को उलझा रहा है और क्या जिला पंचायत सीईओ तक सही जानकारी पहुंचाई जा रही है?

सूत्रों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत भेजने की तैयारी की गई है, जिसमें स्थानांतरण आदेश, कारण बताओ नोटिस, अतिरिक्त प्रभार आदेश तथा इस दौरान हुए वित्तीय कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या जिला प्रशासन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराएगा और यह स्पष्ट करेगा कि आखिर इस विरोधाभासी स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा शासन के आदेशों की गलत व्याख्या कर निर्णय प्रभावित किया गया है, तो क्या उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी?

सख्त कार्यशैली से बढ़ी हलचल में राजनीतिक दबाव की कोशिश? जिला पंचायत सीईओ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म

 जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम प्रजापति की कार्यशैली इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिला स्तर पर भी निर्माण कार्यों और पंचायतों में सामने आ रही शिकायतों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिला पंचायत सीईओ द्वारा जिले भर के विभिन्न ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा, अनियमितताओं पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश तथा आवश्यक मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे कई विभागों में जवाबदेही बढ़ी है।

इसी बीच हाल ही में हुए ग्राम पंचायत बोडरी की सरपंच द्वारा मुख्यमंत्री एवं कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपे जाने का मामला सामने आया है। इस ज्ञापन को लेकर जिले में विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ कथित दलालों, ठेकेदारों एवं राजनीतिक हितों से जुड़े लोगों को जिला पंचायत सीईओ की सख्त कार्यशैली रास नहीं आ रही है और इसी कारण विवाद का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, वहीं यदि शिकायतें निराधार पाई जाती हैं तो ऐसे मामलों के पीछे की मंशा की भी जांच होनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव न बने।

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