नारायण ने रची नारायण लीला, अन्य व्यय खर्च के नाम पर महीने भर में ही कर डाला लाखों भुगतान ,

बुढ़ार जनपद की ग्राम पंचायत खरला में "अन्य व्यय" और मरम्मत मद में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद विकास कार्यों की स्थिति पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। सड़क, नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव, स्टॉप डैम स्वीकृतियों की आवश्यकता और निर्माण गुणवत्ता को लेकर निष्पक्ष तकनीकी जांच, कोर कटिंग व लैब टेस्ट कराने तथा खर्चों का सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने लाने की मांग तेज हो गई है।

Jul 25, 2026 - 08:26
Jul 25, 2026 - 08:27
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नारायण ने रची नारायण लीला,  अन्य व्यय खर्च के नाम पर  महीने  भर में ही कर डाला लाखों भुगतान ,
ग्राम पंचायत खरला
नारायण ने रची नारायण लीला,  अन्य व्यय खर्च के नाम पर  महीने  भर में ही कर डाला लाखों भुगतान ,
नारायण ने रची नारायण लीला,  अन्य व्यय खर्च के नाम पर  महीने  भर में ही कर डाला लाखों भुगतान ,
नारायण ने रची नारायण लीला,  अन्य व्यय खर्च के नाम पर  महीने  भर में ही कर डाला लाखों भुगतान ,
नारायण ने रची नारायण लीला,  अन्य व्यय खर्च के नाम पर  महीने  भर में ही कर डाला लाखों भुगतान ,

अतुल सिंह बघेल / जनसता expose 

ग्राम पंचायत खरला का नया गणित! विकास को मिली छुट्टी, 'अन्य व्यय' बना सबसे बड़ा खिलाड़ी?

बुढ़ार जनपद | ग्राम पंचायत खरला

शहडोल। कहते हैं कि गांव की तस्वीर विकास कार्यों से बदलती है, लेकिन बुढ़ार जनपद की ग्राम पंचायत खरला में चर्चा कुछ और ही है। यहां ग्रामीण तंज कसते हुए कहते हैं कि सड़क, नाली और मूलभूत सुविधाओं का विकास चाहे धीरे-धीरे हो, लेकिन "अन्य व्यय" की रफ्तार किसी एक्सप्रेस ट्रेन से कम नहीं दिखती।

ग्रामीणों के बीच सवाल गूंज रहा है—आखिर यह "अन्य व्यय" है क्या, जो हर बार बजट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा देता है? क्या इसका पूरा हिसाब पंचायत भवन की फाइलों में सुरक्षित है, या फिर आम जनता को भी इसे जानने का अधिकार है? हाल ही में कुछ महीनों में अन्य व्यय के नाम से लाखों निकाले गए और अन्य मरम्मत के नाम से लाखों निकाले गए जिसका हिसाब तो ग्राम पंचायत के हर गली मोहल्ले चीख चीख कर बता रहे हैं निर्माण और विकास देखना हो तो खरला ग्राम पंचायत जाइए! 

"सड़क की जगह कागज़ी विकास! खरला में ग्रामीण पूछ रहे—ज़रूरत गांव की या ठेकेदारों की?"

ग्राम पंचायत खरला के ग्रामीणों का कहना है कि आज भी गांव तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क का अभाव है। बरसात के दिनों में आवागमन कठिन हो जाता है, जिससे आमजन, छात्र, मरीज और किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके बावजूद ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जिन स्थानों पर पहले से स्टॉप डैम बने हुए हैं, वहीं आसपास नए स्टॉप डैमों की स्वीकृतियां किस आधार पर दी जा रही हैं। ठेकेदारों को लाभ दिलाने का कार्य किया जा रहा है क्या तकनीकी अधिकारियों की नजर गांव की वास्तविक जरूरतों—जैसे सड़क, नाली और मूलभूत सुविधाओं—पर नहीं पड़ रही, या फिर प्राथमिकताएं कहीं और तय हो रही हैं? ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि सभी स्वीकृत कार्यों की तकनीकी आवश्यकता और स्वीकृति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजनाएं वास्तव में जनहित में हैं या नहीं।

"सिर्फ लीपापोती नहीं, अब कोर कटिंग और लैब टेस्ट से तय हो कि कंक्रीट मजबूत है या भ्रष्टाचार की परतों पर खड़ा है।”

स्टॉप डैम और घाट निर्माण की गुणवत्ता को लेकर की गई शिकायतों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित शिकायतों की फाइलें आखिर किस मोड़ पर हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्टॉप डैम एवं घाट निर्माण में प्रयुक्त कंक्रीट की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। आवश्यक होने पर संरचना से कोर (Core) सैंपल निकालकर सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कंक्रीट की ग्रेड स्ट्रेंथ (Concrete Grade Strength), गुणवत्ता एवं निर्माण मानकों की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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