कचरे के ढेर में दब गई शहडोल नगरपालिका की सफाई व्यवस्था!
शहडोल नगरपालिका क्षेत्र में खुले में कचरे का अंबार, कचरे के बीच मूक जीवों के शव और उसी कचरे में भोजन तलाशते गौवंश की तस्वीरें सामने आईं। प्लास्टिक-पॉलिथीन और हानिकारक सामग्री से गौवंश की जान को खतरे की आशंका, सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
अतुल सिंह बघेल / मध्यप्रदेश
जहां मूक जीवों के शव फेंके जा रहे, वहीं उसी कचरे में भोजन तलाश रहे गौवंश — प्लास्टिक-पॉलिथीन और जहरीली सामग्री बन सकती है जान का खतरा
शहडोल। नगरपालिका शहडोल की सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई है। शहर के एक खुले क्षेत्र में कचरे का इतना बड़ा ढेर लगा हुआ है कि आसपास का पूरा इलाका कचरा डंपिंग स्थल जैसा नजर आ रहा है। प्लास्टिक, पॉलिथीन, खाद्य सामग्री के पैकेट और तरह-तरह का मिश्रित कचरा खुले में पड़ा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसी कचरे के बीच मूक जीवों के शव भी पड़े दिखाई दे रहे हैं।
मौके की तस्वीरें देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कचरे के निस्तारण की व्यवस्था कितनी बदहाल है। बारिश के कारण कचरे के नीचे गंदा पानी और कीचड़ जमा है। सड़ते कचरे के बीच मृत पशुओं के शव पड़े होने से आसपास के वातावरण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मृत पशुओं के शव और जीवित गौवंश, दोनों एक ही कचरे के बीच
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां मूक जीवों के शव फेंके जा रहे हैं, वहीं जीवित गौवंश भी उसी कचरे के ढेर में भोजन तलाशते नजर आ रहे हैं।
कचरे में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और पॉलिथीन समेत ऐसी सामग्री पड़ी है, जिसे गौवंश भोजन समझकर निगल सकता है। इसके अलावा सड़ी-गली और हानिकारक सामग्री भी कचरे में मिली हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इसी कचरे को खाते-खाते किसी गौवंश की जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
कचरा हटाने की बजाय खुले में डंप करने की मजबूरी क्यों?
नगरपालिका क्षेत्र में घर-घर से कचरा उठाने और शहर को स्वच्छ रखने की व्यवस्था होने के बावजूद अगर कचरा इस तरह खुले में पड़ा है, तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आखिर कचरा उठाने के बाद उसे कहां ले जाया जा रहा है?
मृत पशुओं के शवों का निस्तारण किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है?
खुले में कचरा डालने की अनुमति किसने दी?
और सबसे बड़ा सवाल—इस कचरे के कारण मूक जीवों को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्वच्छता के दावों पर कचरे का ढेर भारी
स्वच्छ शहर की तस्वीर दिखाने के लिए अभियान और दावे अपनी जगह हैं, लेकिन मौके पर दिखाई दे रही तस्वीरें अलग कहानी कह रही हैं। जिस जगह कचरे का व्यवस्थित निस्तारण होना चाहिए, वहां कचरा खुले में पड़ा है और उसी के बीच मृत पशुओं के शव दिखाई दे रहे हैं।
यह मामला केवल गंदगी तक सीमित नहीं है। खुले में पड़ा प्लास्टिक और मिश्रित कचरा पर्यावरण के साथ-साथ पशुओं के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे में नगरपालिका प्रशासन को केवल कचरा उठाने तक सीमित रहने के बजाय यह भी देखना होगा कि कचरे का अंतिम निस्तारण किस तरह और कहां किया जा रहा है।
जिस जगह मूक जीवों के शव फेंके जा रहे हैं, उसी जगह जीवित गौवंश कचरे में भोजन तलाश रहा है। प्लास्टिक-पॉलिथीन और हानिकारक सामग्री खाने से अगर किसी गौवंश की जान जाती है तो जवाबदेही किसकी होगी?
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