जन विश्वास अभियान में लाचार महिला की कलेक्टर से आस, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली मदद
जनपद पंचायत बुढ़ार के ग्राम बिरौड़ी में जन विश्वास अभियान के दौरान करीब 50 वर्षीय लाचार श्यामा बाई साहू कलेक्टर से अपनी बंद पेंशन की समस्या के समाधान की आस लेकर कार्यक्रम स्थल पहुंचीं। शारीरिक रूप से चलने-बैठने में असमर्थ श्यामा बाई घंटों इंतजार करती रहीं, लेकिन निराश होकर लौटना पड़ा। अब उनकी पेंशन बहाल कराने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है।
अतुल सिंह बघेल / जनसत्ता expose
हाथ-पैर की उंगलियों का नहीं हो पाया सामान्य विकास, चलने-बैठने में भी लाचार श्यामा बाई पेंशन के लिए परेशान
शहडोल। शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए भले ही जन विश्वास अभियान चलाया जा रहा हो, लेकिन ग्राम बिरौड़ी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक लाचार महिला की उम्मीद और इंतजार ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर दम तोड़ दिया है।
ग्राम बिरौड़ी, जनपद पंचायत बुढ़ार निवासी करीब 50 वर्षीय श्यामा बाई साहू, पिता झगड़ू साहू शारीरिक रूप से पूरी तरह लाचार हैं। उनके हाथों और पैरों की उंगलियों का सामान्य रूप से विकास नहीं हो पाया है। चलने-बैठने में भी उन्हें काफी परेशानी होती है।
श्यामा बाई की सबसे बड़ी परेशानी उनकी बंद पड़ी पेंशन है। उनका कहना है कि आधार अपडेट और अंगूठा सत्यापन की प्रक्रिया के बाद से उनकी पेंशन बंद हो गई, जिसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर से मिलने की आस में पहुंचीं कार्यक्रम स्थल
श्यामा बाई को जब जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे जन विश्वास अभियान का कार्यक्रम ग्राम बिरौड़ी में आयोजित होने वाला है और कार्यक्रम में कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे, तो उनके मन में उम्मीद जगी कि शायद आज उनकी समस्या जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंच जाएगी।
लाचार होने के बावजूद वह बड़ी उम्मीद लेकर कार्यक्रम स्थल पहुंचीं और कलेक्टर से अपनी समस्या बताकर पेंशन दोबारा शुरू कराने की आस लगाए घंटों इंतजार करती रहीं।
लेकिन इंतजार के बाद भी उनकी उम्मीद पूरी नहीं हो सकी और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
सवाल—आखिर सबसे जरूरतमंद की आवाज कब सुनेगा प्रशासन?
श्यामा बाई जैसी लाचार महिला के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना खुद एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शासन के अभियान का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का समाधान करना है, तो क्या ऐसे जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन अलग से व्यवस्था करेगा?
अब देखना होगा कि श्यामा बाई की बंद पेंशन को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है और उन्हें शासन की योजना का लाभ कब तक मिल पाता है।
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