केशवाही पंचायत ने रचा अनोखा कीर्तिमान! मजदूरों के बिना ही बना डाली पुलिया, पेवर ब्लॉक और घाट निर्माण,

केशवाही ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई कार्यों में पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज नहीं होने के बावजूद बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया। तकनीकी स्वीकृति, निर्माण गुणवत्ता और शिकायतों पर हुई जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अब पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारों पर कार्यवाही की मांग उठ रही है।

Sep 14, 2026 - 00:02
Sep 14, 2026 - 17:37
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केशवाही पंचायत ने रचा अनोखा कीर्तिमान! मजदूरों के बिना ही बना डाली पुलिया, पेवर ब्लॉक और घाट निर्माण,

अतुल सिंह बघेल  / मध्यप्रदेश 

करीब दो करोड़ के निर्माण कार्यों को लेकर शिकायतें, तकनीकी अनियमितताओं के आरोप; जिम्मेदारों की निगरानी पर भी सवाल

शहडोल। जनपद पंचायत बुढार की ग्राम पंचायत केशवाही में पिछले करीब एक वर्ष से कराए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में हुए कई निर्माण कार्यों में पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज नहीं है, इसके बावजूद निर्माण कार्य पूर्ण दर्शाकर बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया।

मामला केवल मजदूरों की हाजिरी तक सीमित नहीं है। निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, मौके पर हुए निर्माण, गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी शिकायतकर्ता गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

मजदूर नहीं तो निर्माण किसने किया?

शिकायतकर्ता के अनुसार कई निर्माण कार्यों में एक भी मजदूर की हाजिरी पोर्टल पर दर्ज नहीं दिखाई दे रही है। इसके बावजूद काम पूरा दर्शाया गया और भुगतान किया 

जब पोर्टल पर मजदूर ही नहीं हैं, तो निर्माण कार्य किसने किया?

यदि मजदूरों ने काम किया तो उनकी हाजिरी और मजदूरी का रिकॉर्ड कहां है? और यदि मजदूरों ने काम नहीं किया तो निर्माण कार्य कैसे पूरा हुआ?

यही सवाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत को सामने लाता है।

सात कार्यों में करीब 30 लाख की स्वीकृति

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार पंचायत में सामने आए सात निर्माण कार्यों की कुल स्वीकृत राशि ₹30,06,054 है। इन कार्यों में बिलों के माध्यम से कुल ₹29,60,498 भुगतान बताया गया है।

इनमें पंचायत के सामने पेवर ब्लॉक/सार्वजनिक चबूतरा निर्माण, सार्वजनिक चबूतरा निर्माण, सड़क पर बिजली के खंभे लगाने का कार्य, देवेंद्र महरा के घर के पास पुलिया निर्माण, अन्य सार्वजनिक चबूतरा निर्माण, आजीविका भवन के पास पुलिया निर्माण और ह्यूम पाइप का कार्य शामिल है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार स्वीकृत और भुगतान राशि में कुल ₹45,556 का अंतर है। यह अंतर अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन भुगतान और वास्तविक कार्य का सत्यापन आवश्यक है।

तकनीकी स्वीकृति पर भी गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्यों में तकनीकी स्वीकृति के अनुरूप कार्य नहीं होने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तकनीकी स्वीकृति में निर्धारित प्रावधानों और मानकों के अनुसार मौके पर काम नहीं कराया गया।

यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल केवल पंचायत स्तर पर नहीं, बल्कि तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी उठेंगे।

मजदूरी का प्रावधान, लेकिन हाजिरी का रिकॉर्ड सवालों में

शिकायतकर्ता का कहना है कि तकनीकी स्वीकृति में मजदूरी का प्रावधान रहता है। इसके बावजूद कुछ कार्यों में मजदूरों की हाजिरी नहीं दिखाई दे रही, जबकि बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया।

मस्टर रोल, पोर्टल की हाजिरी, सामग्री बिल, माप पुस्तिका और भुगतान वाउचर का मिलान होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितना श्रम हुआ और भुगतान किस आधार पर किया गया।

शिकायतों का अंबार, फिर भी कार्यवाही का इंतजार

केशवाही के निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने का दावा है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार सोशल मीडिया, मीडिया और लिखित शिकायतों के माध्यम से मामला जनपद पंचायत, जिला पंचायत और अन्य अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

उनका कहना है कि शिकायतों से जुड़े दस्तावेजों का पुलिंदा इतना बड़ा हो चुका है कि एक अलमारी भर जाए, लेकिन अपेक्षित कार्यवाही का इंतजार अब भी जारी है।

जांच कमेटी पर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन मामलों में जांच कमेटी गठित हुई, उनमें ऐसे अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई जिनका संबंधित निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी अथवा दायित्व से संबंध रहा है।

यदि यह आरोप सही है तो सवाल उठता है कि जिस व्यवस्था की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उसी व्यवस्था से निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित होगी?

उपयंत्री अमन मंसूरी की भूमिका पर सवाल

केशवाही में निर्माण कार्यों को लेकर उपयंत्री अमन मंसूरी की भूमिका पर भी शिकायतकर्ताओं द्वारा लगातार सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि तकनीकी निगरानी से जुड़े होने के बावजूद कथित अनियमितताओं पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद खबर में उसे भी शामिल किया जाना उचित होगा।

CEO शिवम प्रजापति की सख्ती के बावजूद केशवाही पर नजर क्यों नहीं?

जिला पंचायत CEO शिवम प्रजापति द्वारा जिले में निर्माण कार्यों में अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाने और मामलों में कार्यवाही किए जाने की बात सामने आती रही है।

ऐसे में केशवाही को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—

जब जिले में अनियमितताओं पर सख्त कार्यवाही हो रही है, तो लगातार शिकायतों के बावजूद केशवाही की ओर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पहुंच रही?

क्या स्थानीय स्तर से पूरी जानकारी ऊपर तक नहीं पहुंच रही?

क्या शिकायतों की गंभीरता ऊपर तक नहीं पहुंचाई जा रही?

या फिर कहीं न कहीं शिकायतों को दबाने का प्रयास हो रहा है?

सूत्रों के दावे ने बढ़ाई चर्चा

सूत्रों का दावा है कि जिले में पदस्थ जनपद स्तर के एक अधिकारी का बुढार जनपद पंचायत से जुड़ाव अब भी बना हुआ है। वहीं शिकायतकर्ताओं के बीच यह आरोप भी चर्चा में है कि जिला पंचायत में पदस्थ सिद्दीकी नामक अधिकारी, जिन्हें शिकायतकर्ताओं द्वारा उपयंत्री अमन मंसूरी का रिश्तेदार बताया जा रहा है, मामले में संरक्षण दे रहे हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि शिकायतकर्ताओं के पास इन दावों से संबंधित दस्तावेज हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

करीब एक साल में दो करोड़ के आसपास के कार्यों का दावा

स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार करीब एक वर्ष में ग्राम पंचायत केशवाही में लगभग दो करोड़ रुपये के आसपास के निर्माण कार्य कराए जाने का दावा है।

इतनी बड़ी राशि के कार्यों में यदि मजदूरों की हाजिरी, तकनीकी मानकों, सामग्री और भुगतान को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो पूरे मामले का व्यापक ऑडिट और भौतिक सत्यापन जरूरी हो जाता है।

अब भोपाल तक पहुंचेगा शिकायतों का पुलिंदा

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने पर अब मामले को भोपाल तक ले जाया जाएगा।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत में हुए निर्माण कार्यों के दस्तावेज, पोर्टल रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी जानकारी और पूर्व में की गई शिकायतों को एकत्र कर वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रालय के समक्ष जांच की मांग रखी जाएगी।

अब कागज नहीं, जमीन पर हो सत्यापन

केशवाही पंचायत के मामले में निष्पक्ष जांच के लिए पोर्टल पर दर्ज मजदूरों की हाजिरी, मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, सामग्री बिल, भुगतान वाउचर और निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान जरूरी है।

अगर रिकॉर्ड सही है तो जांच से शिकायतें गलत साबित होंगी और यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी तय कर कार्यवाही का रास्ता साफ होगा।

अब सवाल सिर्फ केशवाही पंचायत का नहीं, बल्कि उस निगरानी व्यवस्था का है जिसके तहत सरकारी धन से निर्माण कार्य कराए जाते हैं।

शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, सवाल लगातार उठ रहे हैं—अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन सवालों का जवाब जांच के जरिए देते हैं या फिर शिकायतों का पुलिंदा एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाता है।

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