क्या कमीशन के खेल में दब गईं शिकायतें? खरला पंचायत में कार्रवाई से पहले ही निकल गए भुगतान
बुढ़ार जनपद की ग्राम पंचायत खरला में विकास कार्यों, "अन्य व्यय", प्रशासनिक व्यय और निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने और भुगतान जारी रहने से पंचायत सचिव एवं तकनीकी अमले की भूमिका की निष्पक्ष जांच, कोर कटिंग, लैब टेस्ट तथा वित्तीय ऑडिट की मांग तेज हो गई है।
अतुल सिंह बघेल / जनसत्ता expose
बुढ़ार (शहडोल)। जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत खरला इन दिनों विकास कार्यों की गुणवत्ता, "अन्य व्यय", प्रशासनिक व्यय तथा निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विभिन्न कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत संबंधित कार्यों के भुगतान भी जारी रहे, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आज भी कई स्थानों पर सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। बरसात के दिनों में ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद पंचायत अभिलेखों में "अन्य व्यय", "अन्य मरम्मत" तथा "प्रशासनिक व्यय" मद में लगातार राशि व्यय होना दर्ज है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि लाखों रुपये खर्च हुए हैं तो उसका प्रत्यक्ष लाभ गांव को क्यों दिखाई नहीं देता?
खरला पंचायत में 'अन्य व्यय' का कमाल, विकास फिर हुआ बेहाल!
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव नारायण यादव के कार्यकाल में प्रशासनिक व्यय एवं अन्य व्यय के नाम पर उल्लेखनीय राशि निकाली गई। वहीं स्टॉप डैम, व घाट निर्माण एवं अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायतें संबंधित अधिकारियों को दी गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन शिकायतों से संबंधित उपयंत्री नीलिमा श्रीवास्तव को भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक न तो किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच की जानकारी सामने आई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई हुई।
यही कारण है कि अब सबसे बड़ा सवाल भुगतान प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्तियां दर्ज थीं, तो संबंधित कार्यों के बिल किस आधार पर पारित किए गए? क्या भुगतान से पहले स्थल निरीक्षण हुआ? क्या माप पुस्तिका (Measurement Book) का सत्यापन नियमानुसार किया गया? क्या गुणवत्ता परीक्षण कराया गया? यदि कराया गया तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में स्वीकृत स्टॉप डैम और घाट निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। आवश्यकता पड़ने पर कोर कटिंग (Core Cutting) कराकर सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कंक्रीट की ग्रेड स्ट्रेंथ और गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण स्वीकृत मानकों के अनुरूप हुआ या नहीं।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के "अन्य व्यय", "अन्य मरम्मत" एवं "प्रशासनिक व्यय" मद में हुए खर्च का बिंदुवार सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी किया जाए। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान, माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृतियां, उपयोगिता प्रमाण-पत्र तथा संबंधित वित्तीय अभिलेखों की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद यदि भुगतान जारी रहे हैं तो यह जांच का विषय है कि शिकायतों का परीक्षण किस स्तर पर किया गया और शिकायतों का निराकरण किए बिना भुगतान की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई।
अब ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र तकनीकी समिति, जिला स्तरीय जांच दल, लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) अथवा अन्य सक्षम जांच एजेंसी से कराई जाए। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, तकनीकी लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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