एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की शारदा माइंस में कार्यरत आरके अर्थ रिसोर्सेज पर मजदूरों ने लगाए वेतन, सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर आरोप
एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की शारदा माइंस में कार्यरत निजी कंपनी आरके अर्थ रिसोर्सेज पर मजदूरों ने कम मजदूरी, भुगतान में पारदर्शिता की कमी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। श्रमिकों ने डीजीएमएस, श्रम विभाग और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अतुल सिंह बघेल / शहडोल
एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की शारदा माइंस में कार्यरत निजी कंपनी आरके अर्थ रिसोर्सेज एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। सूत्रों और कुछ मजदूरों के अनुसार, खदान में जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य कराने के बावजूद उन्हें मात्र ₹693 प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा है। मजदूरों का आरोप है कि उनके कार्य की प्रकृति, जोखिम और मेहनत की तुलना में यह भुगतान बेहद कम है तथा भुगतान प्रक्रिया में भी पारदर्शिता का अभाव है।
मजदूरों का कहना है कि वे प्रतिदिन भारी मशीनों, कोयला परिवहन और खनन क्षेत्र जैसी अत्यधिक जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं। इसके बावजूद उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि उनका वेतन किस आधार पर तय किया गया है, ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम और अन्य वैधानिक सुविधाएं नियमित रूप से मिल रही हैं या नहीं।
सूत्रों का दावा है कि कंपनी के कार्यों को लेकर पहले भी समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। अब मजदूरों ने भी प्रशासन, श्रम विभाग और एसईसीएल प्रबंधन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
डीजीएमएस और खनन नियम क्या कहते हैं?
भारत में कोयला खदानों की सुरक्षा व्यवस्था DGMS (Directorate General of Mines Safety) के अधीन होती है। कोयला खदानों में सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल संबंधी नियम Coal Mines Regulations, 2017, Mines Act तथा Occupational Safety, Health and Working Conditions से नियंत्रित होते हैं। इन नियमों के अनुसार खदान प्रबंधन पर सुरक्षित कार्यस्थल, प्रशिक्षण, जोखिम नियंत्रण और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होती है।
यदि किसी मजदूर से जोखिमपूर्ण कार्य कराया जा रहा है तो सुरक्षा मानकों का पालन, प्रशिक्षण, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), स्वास्थ्य संबंधी प्रावधान और अन्य वैधानिक दायित्वों का पालन अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।
मजदूरों की प्रमुख मांगें
वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।
ईपीएफ, ईएसआई और अन्य श्रम कानूनों के पालन की जांच हो।
डीजीएमएस एवं श्रम विभाग संयुक्त निरीक्षण करें।
जोखिम के अनुरूप सुरक्षा उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाए तो दोषियों पर कार्रवाई हो।
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